संगठन सेटअप

संगठनात्मक जानकारी - परिचय
राजीव गांधी भवन
नई दिल्ली, सफदरजंग हवाईअड्डे पर राजीव गांधी भवन में स्थित नागर विमानन मंत्रालय विकास के लिए राष्ट्रीय नीतियों एवं कार्यक्रमों के गठन तथा देश में नागर विमानन सेक्टर के विनियमन के लिए उत्तरदायी है। यह विमान अधिनियम, 1934, विमान नियम 1937 तथा विमान सेक्टर से सबंधित अनेक अन्या विधायों के प्रशासन के लिए भी उत्तरदायी है। यह मंत्रालय संबद्ध तथा स्वायत्तनशासी संगठनों यथा नागर विमानन महानिदेशालय, नागर विमानन सुरक्षा ब्यूरो तथा इंदिरा गांधी राष्ट्रीय उड़ान अकादमी एवं संबद्ध सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रम यथा भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण और पवन हंस हेलीकॉप्टकर लिमिटेड पर प्रशासनिक नियंत्रण संबंधी कार्य करता है। रेल संरक्षा आयोग, जो कि रेल ट्रेवल तथा रेलवे अधिनियम, 1989 के प्रावधानों की शर्तों के तहत प्रचालन की सुरक्षा के लिए उत्तररदायी है, भी इस मंत्रालय के प्रशासनिक नियंत्रण के तहत आता है।
संबद्ध-स्वाियत्ताशासी संगठन नागर विमानन महानिदेशालय (डीजीसीए)
संबद्ध-स्वाियत्ताशासी संगठन नागर विमानन महानिदेशालय (डीजीसीए)
नागर विमानन महानिदेशालय (डीजीसीए) नागर विमानन क्षेत्र में नियामक निकाय है जो कि मुख्यवत: संरक्षा संबंधी मामलों को देखती है। यह भारत के लिए/से विमान परिवहन सेवाओं के विनियमन तथा नागर विमानन विनियमों, विमान सुरक्षा तथा उड़नयोग्य ता मानदंडों को लागू करने के लिए उत्र्विमदायी है। डीजीसीए अंतरराष्ट्रीोय नागर विमानन संगठन (इकाओ) के साथ सभी विनियामक कार्यों में समन्वोयन का कार्य भी करता है। भारत विमानन उद्योग वैश्विगक रूप से सबसे तीव्र विकास करने वाला सेक्टनर है। आधे दशक के पूर्व में उदारीकरण का अभियान आरंभ होने के परिणामस्व्रूप इस सेक्ट‍र में तेजी से बदलाव आया है। भारत में नागर विमानन उद्योग की मूल शुरूआत 1912 में हुई जब पहली विमान उड़ान कराची तथा दिल्ली के बीच यू;के. की इम्पीहरियल एयरवेज के सहयोग से इंडियन स्टेकट एयर सर्विसेज द्वारा शुरू की गई। यह एक इम्पी;रियल एयरवेज का लंदन-कराची उड़ान का विस्ता्र था। वर्ष 1932 में, जेआरडी टाटा द्वारा संस्थाीपित टाटा एयरलाइन पहली भारतीय एयरलाइन थी। स्वथतंत्रता के समय, नौ विमान परिवहन कंपनियों द्वारा एयर कार्गो तथा या‍त्रियों दोनों का वहन किया जा रहा था। 1948 के प्रारंभ में, भारत सरकार द्वारा 2 करोड़ रूपए की पूंजी तथा लॉकहीड कांस्टे लेशन विमान के साथ एअर इंडिया (पूर्ववर्ती टाटा एयरलाइन) के सहयोग से एअर इंडिया इंटरनेशनल लिमिटेड नामक संयुक्तक उद्यम कंपनी की स्थाूपवना की गई। एअर इंडिया इंटरनेशनल लिमिटेड की उदघाटन उड़ान 8 जून, 1948 को मुम्बाई- लंदन वायुमार्ग पर शुरू हुई। सरकार द्वारा एयर कार्पोरेशन अधिनियम, 1953 के तहत नौ एयरलाइन कंपनियों का राष्ट्री यकरण किया गया। इन सरकारी स्वाममित्वन वाली एयरलाइनों का 1990 के मध्यि तक भारतीय विमानन उद्योग में प्रभुत्वा रहा। अप्रैल, 1990 में, सरकार द्वारा खुली आकाश नीति को स्वीभकार किया गया और विमान टैक्सीस प्रचालकों को चार्टर तथा गैर चार्टर दोनों आधार पर किसी भी हवाईअड्डे से प्रचालन करने की अनुमति दी गई और उन्हेंक स्वगयं उड़ान शेड्यूल, कार्गो एवं यात्री किरायों को निर्धारित करने की भी अनुमति दी गई। 1994 में खुली आकाश नीति के हिस्सेक के रूप में, सरकार ने विमान परिवहन सेवाओं में इंडियन एयरलाइंस और एअर इंडिया के एकाधिकार को समाप्तं कर दिया। बहरहाल, किसी भी विदेशी एयरलाइन का प्रत्यंक्ष अथवा अप्रत्यपक्ष रूप से घरेलू एयरलाइन कंपनी में इक्विटी हिस्सेरदारी नहीं है। 1995 तक, विमानन व्यूवसाय में अनेक निजी एयरलाइनें शामिल हो गई और घरेलू विमान यातायात में उनका हिस्साक 10 प्रतिशत से भी अधिक हो गया। आज, भारतीय विमानन उद्योग में निजी एयरलाइनों का प्रभुत्व1 हो गया है और इनमें कम लागत वाले विमावाहक शामिल हैं जिनके आने से वायु यात्रा वहनीय हो गई है।सिविल विमान का पंजीकरणभारत में पंजीकृत सिविल विमान के लिए उड़नयोग्यनता के लिए मानदंडों का गठन और ऐसे विमान के लिए उड़नयोग्यमता प्रमाणपत्र देना।पायलटों, विमान अनुरक्षण इंजीनियरों तथा उड़ान इंजीनियरों को लाइसें‍स देना तथा इस प्रयोजन से परीक्षण तथा जांच आयोजन करनाविमान यातायात नियंत्रकों को लाइसेंस देनाएयरोड्रम तथा सीएनएस/एटीएम सुविधाओं का प्रमाणनभारतीय वाहकों के लिए विमान प्रचालक प्रमाण पत्र प्रदान करना तथा भारतीय एवं विदेशी प्रचालकों द्वारा भारत के भीतर/बाहर के लिए/से विमान परिवहन सेवाओं के प्रचालन का विनियमन करना जिनमें ऐसे प्रचालकों के अनुसूचित और गैर अनुसूचित के क्लियरेंस शामिल हैं।दुर्घटनाओं/घटनाओं की जांच करना तथा संरक्षा विमानन प्रबंधन कार्यक्रम के गठन एवं कार्यान्वटयन सहित दुर्घटना निवारक उपाय लागू करनाविमान अधिनियम, विमान नियम तथा इकाओ अनुबंधों में संशोधनों का अनुपालन करने के लिए नागर विमानन अपेक्षाओं में संशोधन करना तथा किसी अन्यश अधिनियम में संशोधन के लिए अथवा एक अंतरराष्ट्रीरय अभिसमय को प्रभावशाली बनाने के लिए अधिनियम को पास करने अथवा मौजूदा अभिसमय में संशोधन करने के लिए प्रस्ताअव तैयार करना।सिविल तथा मिलिट्री विमान यातायात एजेंसियों द्वारा वायुक्षेत्र के फ्लैक्सीय प्रयोग हेतु राष्ट्री य स्तिर पर समन्वबयन तथा भारतीय वायु क्षेत्र द्वारा सिविल प्रयोग हेतु अधिक वायु मार्गों के प्रावधान के लिए इकाओ के साथ बातचीत करना।इकाओ के अनुबंध-16 के अनुसार विमान की ध्वनि तथा इंजन उत्ससर्जन पर निगरानी रखना तथा यदि आवश्यरकता हो इस मुद्दे पर पर्यावरण प्राधिकरणों के साथ समन्वउय करना।उत्प्रेारक एजेंट के रूप मे कार्य करते हुए घरेलू डिजाइन तथा विमान व विमान पुर्जों के विनिर्माण का संवर्धेन।खतरनाक सामान के वहन के लिए प्रचालकों के प्रशिक्षण कार्यक्रमों को स्वी कृति प्रदान करना तथा खतरनाक सामानों के वहन के लिए प्राधिकार जारी करना आदि।
भारतीय विमानपत्तन आर्थिक विनियामक प्राधिकरण (एईआरए)
Airports Economic Regulatory Authority of India
भारतीय विमानपत्तन आर्थिक विनियामक प्राधिकरण (एईआरए) की स्थापना भारत सरकार द्वारा दिनांक 12 मई 2009 की अधिसूचना संख्या जी.एस.आर. 317(ई) के माध्यम से भारत सरकार के एक वैधानिक निकाय के रूप में की गई थी। भारत की संसद ने "भारतीय विमानपत्तन आर्थिक विनियामक प्राधिकरण अधिनियम, 2008" (जिसे आगे "अधिनियम" कहा जाएगा) अधिनियमित किया। उक्त अधिनियम के अंतर्गत "भारतीय विमानपत्तन आर्थिक विनियामक प्राधिकरण" (जिसे आगे "एईआरए" कहा जाएगा) नामक एक वैधानिक प्राधिकरण की स्थापना का प्रावधान किया गया है, जिसका उद्देश्य वैमानिक सेवाओं के लिए शुल्क का विनियमन करना, प्रमुख विमानपत्तनों पर प्रदान की जाने वाली सेवाओं के लिए अन्य विमानपत्तन शुल्क निर्धारित करना तथा ऐसे विमानपत्तनों के प्रदर्शन मानकों की निगरानी करना है। उक्त अधिनियम के प्रावधान 1 सितम्बर, 2009 से प्रभावी हुए।प्रमुख विमानपत्तनों के संबंध में एईआरए के कार्य अधिनियम की धारा 13 में निम्नानुसार निर्दिष्ट किए गए हैं:विमानपत्तन सुविधाओं के सुधार हेतु किए गए पूंजीगत व्यय तथा समयबद्ध निवेश को ध्यान में रखते हुए वैमानिक सेवाओं के लिए शुल्क निर्धारित करना।दक्षता में सुधार की लागत का निर्धारण करना।प्रमुख विमानपत्तनों के आर्थिक एवं व्यवहार्य संचालन को सुनिश्चित करना।केंद्र सरकार द्वारा किसी समझौते, समझौता ज्ञापन अथवा अन्य किसी माध्यम से प्रदान की गई रियायतों को ध्यान में रखना।अधिनियम के उद्देश्य की पूर्ति हेतु प्रासंगिक अन्य किसी भी कारक पर विचार करना।विकास शुल्क (Development Fee) की राशि निर्धारित करना।विमान अधिनियम, 1934 के अंतर्गत बनाए गए विमान नियम, 1937 के नियम 88 के तहत लगाए जाने वाले यात्री सेवा शुल्क (Passenger Service Fee) की राशि निर्धारित करना।केंद्र सरकार अथवा उसके द्वारा इस संबंध में अधिकृत किसी प्राधिकरण द्वारा निर्दिष्ट सेवा की गुणवत्ता, निरंतरता एवं विश्वसनीयता से संबंधित निर्धारित प्रदर्शन मानकों की निगरानी करना।वैमानिक सेवाओं के लिए शुल्क निर्धारण हेतु आवश्यक किसी भी प्रकार की सूचना प्राप्त करना।शुल्क संबंधी ऐसे अन्य कार्य करना जो केंद्र सरकार द्वारा सौंपे जाएं अथवा अधिनियम के प्रावधानों को लागू करने के लिए आवश्यक हों।वर्तमान में भारतीय विमानपत्तन आर्थिक विनियामक प्राधिकरण प्रमुख विमानपत्तनों के बीच स्वस्थ प्रतिस्पर्धा को बढ़ावा देने, विमानपत्तन सुविधाओं में निवेश को प्रोत्साहित करने, उपयोगकर्ताओं के उचित हितों की रक्षा करने तथा वैमानिक सेवाओं/गतिविधियों के लिए शुल्क विनियमन के माध्यम से कुशल, आर्थिक एवं व्यवहार्य विमानपत्तनों के संचालन को सुनिश्चित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। साथ ही यह प्रमुख विमानपत्तनों पर प्रदर्शन मानकों की निगरानी भी करता है।पता:श्री एस.के.जी. रहाटे, आईएएस (सेवानिवृत्त), अध्यक्ष,एईआरए भवन, सफदरजंग हवाई अड्डा, नई दिल्ली – 110003।
नागर विमानन सुरक्षा ब्यूरो
नागर विमानन सुरक्षा ब्यूरो
आरंभिक तौर पर नागर विमानन सुरक्षा ब्यूुरो की स्थापना पांडे समिति की सिफारिशों पर जनवरी, 1978 में नागर विमानन महानिदेशालय में एक प्रकोष्ठा के रूप में हुई थी। 01 अप्रैल, 1997 को नागर विमानन सुरक्षा ब्यूरो की पुन:स्थापना नागर विमानन मंत्रालय में एक स्वतंत्र विभाग के रूप में हुई। नागर विमानन सुरक्षा ब्यूोरो के मुख्य उत्तरदायित्व में भारत में अंतरराष्ट्रीय तथा घरेलू हवाईअड्डों पर नागरिक उडानों के संबंध में मानकों तथा उपायों का निर्धारित करना शामिल है। नगर विमानन सुरक्षा ब्यूरो का मुख्य कार्यालय ए-विंग, I-III तल, जनपथ भवन, नई दिल्ली 110001 में स्थित है। इसके चार क्षेत्रीय कार्यालय अंतरराष्ट्रीरय हवाई अडडों यथा दिल्ली, मुम्बई, कोलकाता तथा चेन्नई में स्थित है।हवाई अड्डा संचालकों,एयरलाइंस ऑपरेटरों के लिए आईसीएओ के शिकागो सम्मेलन के लिए अनुलग्नक 17 के अनुसार उड्डयन सुरक्षा मानक,और उनकी सुरक्षा एजेंसियों ए वी एस ई सी उपायों को लागू करने के लिए जिम्मेदार हैं।सुरक्षा नियमों तथा विनियमों की मॉनीटरिंग और सुरक्षा आवश्यमकताओं के लिए सर्वेक्षण करना।यह सुनिश्चित करना कि सुरक्षा नियंत्रणों को लागू करने वाले व्यक्ति उपयुक्तत रूप से प्रशिक्षित हों तथा अपने कर्तव्यों के निष्पादन के लिए अपेक्षित सभी सक्षमताएं ग्रहण किए हों।विमानन सुरक्षा विषयों का नियोजन तथा समन्वेय।Surprise/Dummy checks to test professional efficiency and alertness of security staff.आकस्मिक जांचों की कुशलता तथा विभिन्न एजेंसियों की प्रचा‍लनिक तत्पमरता की जांच करने के लिए मॉक अभ्यास। Address:Shri Rajesh Nirwan, IPS, Director General, (BCAS) Safdarjung Airport, 2nd Floor Udaan Bhawan,New Delhi-110003Phone:-  (+91)-011-24610012 Email:- dg[dot]bcas[at]gov[dot]in
विमान दुर्घटना जांच ब्यूरो
Aircraft Accident Investigation Bureau
वायुयान अधिनियम 1934 की धारा 7 भारत सरकार को भारत में या उसके ऊपर किसी भी वायुयान, या भारत में पंजीकृत किसी भी वायुयान के भारत में या उसके ऊपर उड़ान के दौरान होने वाली दुर्घटनाओं की जाँच के लिए नियम बनाने का अधिकार देती है। अधिनियम के अनुसार और अंतर्राष्ट्रीय नागरिक उड्डयन अभिसमय के अनुच्छेद 26 के अनुरूप, पहले डीजीसीए का वायु सुरक्षा निदेशालय, वायुयान दुर्घटनाओं और घटनाओं की जाँच से संबंधित कर्तव्यों और जिम्मेदारियों का निर्वहन करता था। यह वायुयान नियम 1937 द्वारा शासित था।अंतर्राष्ट्रीय नागरिक उड्डयन संगठन (आईसीएओ) द्वारा जारी मानकों और अनुशंसित प्रथाओं (एसएआरपी) के अनुसार और नियामक कार्य से जांच कार्य की स्वतंत्रता प्रदान करने के लिए, भारत सरकार ने डीजीसीए से स्वतंत्र एक ब्यूरो स्थापित करने का निर्णय लिया।आईसीएओ एसएआरपी और भारतीय नागरिक उड्डयन परिदृश्य को ध्यान में रखते हुए, विमान (दुर्घटनाओं और घटनाओं की जाँच) नियम, 2012 तैयार किए गए और राजपत्र अधिसूचना के माध्यम से अधिसूचित किए गए। इन नियमों के अनुसार और दुर्घटनाओं, गंभीर घटनाओं और हादसों की जाँच के उद्देश्य से, भारत सरकार ने 30 जुलाई 2012 को नागरिक उड्डयन मंत्रालय में एक ब्यूरो की स्थापना की, जिसे भारतीय विमान दुर्घटना जाँच ब्यूरो (एएआईबी) के नाम से जाना जाता है।आईसीएओ अनुलग्नक 13 के अनुसार, विमान (दुर्घटनाओं और घटनाओं की जाँच) नियम 2012 को 2017 में संशोधित किया गया और एएआईबी को नागरिक उड्डयन मंत्रालय के "संलग्न कार्यालय" के रूप में नामित किया गया। वर्तमान में, जाँच कार्य संशोधित विमान (दुर्घटनाओं और घटनाओं की जाँच) नियम 2017 और विमान (दुर्घटनाओं और घटनाओं की जाँच) संशोधन नियम, 2021 के अनुसार किया जा रहा है। एएआईबी को न्यायिक निकायों या अन्य सरकारी प्राधिकारियों की पूर्व सहमति के बिना किसी भी एजेंसी/संगठन से सभी प्रासंगिक साक्ष्यों तक तत्काल और अप्रतिबंधित पहुँच प्रदान करने का अधिकार दिया गया है।Address: Shri G.V.G. Yugandhar, Director General (AAIB), Safdarjung Airport, New Delhi - 110003
रेल संरक्षा आयोग(सीआरएस)
रेल संरक्षा आयोग(सीआरएस)
रेल संरक्षा आयोग, जो नागर विमानन मंत्रालय तथा भारत सरकार के प्रशासनिक नियंत्रण के अधीन कार्यरत है, रेल प्रचालन की सुरक्षा से संबंधित मुद्दों पर कार्य करता है और रेल अधिनियम(1989) में निर्धारित कतिपय सांविधिक कार्यों से प्रभारित है, जो कार्य निरीक्षणीय, जांच तथा सलाहकार प्रकृति के हैं। आयोग का सर्वाधिक महत्वापूर्ण दायित्वै यह सुनिश्चित करना है कि यात्री यातायात के लिए आरंभ होने वाली कोई नई लाइन यात्री यातायात के वहन के हर दृष्टिकोण से सुरक्षित है। यह अन्यआ कार्यों पर भी लागू है जैसे आमान परिवर्तन, लाइन दोहरीकरण तथा मोजूदा लाइनों का विद्युतीकरण। आयोग भरतीय रेलों में हुई गंभीर रेल दुर्घटनाओं की सांविधिक जांच भी करता है और भारत में रेल की सुरक्षा में सुधार के लिए सिफारिशें भी करता है। Address:Shri Janak Kumar Garg, IRSEE, Chief Commissioner of Railway Safety (CCRS) 3rd Floor, Traffic Accounts Building, State Entry Road, New Delhi Pin: 110055.Tel.:011-23369778
भारतीय विमानपत्तटन प्राधिकरण (एएआई)
भारतीय विमानपत्तटन प्राधिकरण (एएआई)
भारत के विमानपत्तन प्राधिकरण (एएआई) 1 अप्रैल 1995 को एक दृष्टि से भारत के अंतरराष्ट्रीय विमानपत्तन प्राधिकरण और राष्ट्रीय विमानपत्तन प्राधिकरण से कम एकीकृत विकास, विस्तार, परिचालन टर्मिनल, और कार्गो सुविधाओं का आधुनिकीकरण और तेजी लाने के विलय द्वारा बनाई गई थीदेश में हवाई अड्डों के अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप.अधिक जानकारी के लिए भारतीय विमानपत्तटन प्राधिकरण (एएआई) वेबसाइट देखेंअंतरराष्ट्री य तथा घरेलू एयरलाइनों और सिविल इन्कीलेवों का अभिकल्पं, विकास, प्रचालन तथा अनुरक्षण।इकाओ द्वारा स्वीतकृत अनुसार देश की भौगोलिक सीमाओं से परे तक विस्तावरित भारतीय वायु क्षेत्र का नियंत्रण तथा प्रबंधन।यात्री टर्मिनलों का निर्माण, आशोधन एवं प्रबंधनअंतरराष्ट्री य तथा घरेलू हवाईअड्डों पर कार्गो का विकास तथा प्रबंधन।हवाईअड्डों पर यात्री टर्मिनलों पर यात्री सुविधाओं तथा सूचना प्रणाली का प्रावधान।प्रचालनिक क्षेत्र यथा रनवे, एप्रन, टैक्सीर वे आदि का विस्तारर तथा सुदृढ़ीकरण।विजुअल एैड्स का प्रावधानसूचना एवं दिक्क्चालन सहायक उपकरणों यथा आईएलएस, डीवीओआर, डीएएमई, राडार आदि का प्रावधान।
पवन हंस हेलीकॉप्टर्स लिमिटेड
Pawan Hans Helicopters Limited
पवन हंस हेलीकॉप्टर्स लिमिटेड (PHHL) भारत की अग्रणी हेलीकॉप्टर कंपनियों में से एक है और अपने विश्वसनीय हेलीकॉप्टर संचालन के लिए जानी जाती है। इसका उद्देश्य तेल क्षेत्र को उसके अपतटीय अन्वेषण कार्यों के लिए हेलीकॉप्टर सहायता सेवाएँ, दूरस्थ और पहाड़ी क्षेत्रों में सेवाएँ, और यात्रा एवं पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए चार्टर सेवाएँ प्रदान करना है। कंपनी का पंजीकृत कार्यालय नई दिल्ली में स्थित है और इसके क्षेत्रीय कार्यालय मुंबई और नई दिल्ली में हैं। PHHL भारत की पहली ISO 9001: 2000 प्रमाणित विमानन कंपनी है। पवन हंस ने भारत में हेलीकॉप्टर उद्योग के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। Address:Shri Sanjeev Razdan, CMD, Pawan Hans Tower, C-14, Sector 1, Noida-201301
एआई एसेट्स होल्डिंग लिमिटेड (एआईएएचएल)
AI Assets Holding Limited (AIAHL)
एआई एसेट्स होल्डिंग लिमिटेड (एआईएएचएल) भारत सरकार द्वारा गठित एक विशेष प्रयोजन वाहन (स्पेशल पर्पज़ व्हीकल - एसपीवी) है, जिसका उद्देश्य इसके ज्ञापन-पत्र (Memorandum of Association) के उद्देश्य खंडों में उल्लिखित अनुसार एकीकृत परिसंपत्ति धारण सेवाएँ प्रदान करना है। कंपनी के गठन के समय इसके निम्नलिखित उद्देश्यों का निर्धारण किया गया था:एयर इंडिया लिमिटेड से निम्नलिखित कंपनियों में उसकी हिस्सेदारी का अधिग्रहण करना:एयर इंडिया एयर ट्रांसपोर्ट सर्विसेज लिमिटेडएयर इंडिया इंजीनियरिंग सर्विसेज लिमिटेडएयरलाइन एलाइड सर्विसेज लिमिटेडहोटल कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेडपता:श्री अमित कुमार, अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक (सीएमडी),द्वितीय तल,एआई प्रशासनिक भवन,सफदरजंग हवाई अड्डा,नई दिल्ली – 110003।
राजीव गांधी राष्ट्रीय विमानन विश्वविद्यालय
राजीव गांधी राष्ट्रीय विमानन विश्वविद्यालय
राजीव गांधी राष्ट्रीय विमानन विश्वविद्यालय (एक केंद्रीय विश्वविद्यालय) भारत का पहला राष्ट्रीय विमानन विश्वविद्यालय है, जिसकी स्थापना संसद के अधिनियम, 2013 के अंतर्गत की गई थी। विश्वविद्यालय का परिसर फुरसतगंज एयरफील्ड में पूरी तरह से संचालित है और यह भारत सरकार के नागरिक उड्डयन मंत्रालय के प्रत्यक्ष प्रशासनिक नियंत्रण में कार्य करता है। इसका उद्देश्य भारत में “विमानन क्षेत्र का यूजीसी (UGC)” बनना है।NAU (National Aviation University) की सह-स्थिति इंदिरा गांधी राष्ट्रीय उड़ान अकादमी (Indira Gandhi Rashtriya Uran Akademi – IGRUA) के साथ है, जो पिछले 35 वर्षों से वाणिज्यिक पायलट प्रशिक्षण प्रदान कर रही है और जिसके पास 24 विमान हैं। यह विश्वविद्यालय और फ्लाइंग ट्रेनिंग संगठन का एक अनूठा संयोजन है, जो एक-दूसरे के पूरक हैं, और विश्व में ऐसे बहुत कम उदाहरण मिलते हैं।RGNAU में पूर्णकालिक विश्वविद्यालय अधिकारी कार्यरत हैं, जिनके संपर्क विवरण निम्नलिखित हैं:कार्यवाहक कुलपति: प्रो. भृगु नाथ सिंहकार्यवाहक कुलसचिव: प्रो. एस. एल. हरिकुमारपता:राजीव गांधी राष्ट्रीय विमानन विश्वविद्यालय(नागरिक उड्डयन मंत्रालय, भारत सरकार के अधीन)फुरसतगंज एयरफील्ड, अमेठी, उत्तर प्रदेश – 229302फोन: +91 535-2978065वेबसाइट: www.rgnau.ac.in